Saturday, 10 November 2012

तुलसी विवाह



।। देव प्रबोधनी एकादशी ।। देव उठनी एकादशीद्ध

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान नारायण शयन से उठते हैं। इस दिन भगवान को सायंकाल के समय शंख घंटा घडि़याल के द्वारा जगाना चाहिये।
प्रार्थना करनी चाहिये

           उत्तिष्ठोत्तिष्ठ  गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज।

           उत्तिष्ठ कमला कान्त त्रैलोक्यं मंगलं कुरु।।

प्रभो उठिये और त्रिलोकी का मंगल करिये। तथा उठाकर भगवान की पूजा तुलसी फष्प आदि से करें। तथा कथा श्रवण करें। शास्त्रों में कहा है, भगवत् कथा से सौ कुलों का उद्धार होता है।
              कुलानां तारयेत् शतम्
सुमेरु के समान भी पाप इसके व्रत के प्रभाव से नष्ट हो जाते हैं। देवोत्त्थापिपी एकादशी को रात्रि जागरण करने पर अश्वमेघ यज्ञ के फल की प्राप्ति होती है।

।। तुलसी विवाह ।।

एक मत से कार्तिक शुक्ला नवमी से एकादशी तक तुलसी विवाह मनाते हैं। एक मत से कार्तिक शुक्ला एकादशी से पूर्णिमा तक तुलसी जी का विवाह मनाते हैं।
सर्वमान्य देवोत्थापिनी एकादशी को ही तुलसी जी का विवाह शालग्राम भगवान् से करना चाहिये।
अतः कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी जी का विवाह शालग्राम शिला से कराना चाहिये। 2-3 महीने पहले तुलसी वृक्ष को गमले में लगानी चाहिये। तथा प्रतिदिन जल से सींच गंध, फष्प से पूजन करना चाहिये। फिर का. शु. . से का. शु. पूर्णिमा तक किसी दिन भी जैसे अपनी कन्या का विवाह करते हैं वैसे ही गमले को गेरु से पोतकर सजाकर तुलसी जी को साड़ी पहनाकर मेंहदी रोली अर्पण करें। तथा सायंकाल में ईख से मण्डल तैयार करें। मन प्रसन्न कर उत्साह पूर्वक भगवान नारायण से प्रार्थना करें।
आगच्छ भगवान्देव  अर्चयिष्यामि केशव।
तुभ्यं  ददामि   तुलसीं  सर्वकाम  प्रदोभव।।
हे भगवान् पधारिये मैं आपकी पूजा करूंगा तथा आपको तुलसी अर्पण करूंगा। आप मेरी सब कामना पूर्ण करिये। इसके पश्चात् विद्वान् ब्राह्मण के द्वारा विवाह विधि से पाद्य, अध्र्य, मधुपर्क आदि से पूजा करें। तथा कन्यादान, शाखोच्चार, मंगलाष्टक करें। अग्नि स्थापन, हवन करके अग्नि की तुलसी जी को आगे कर 1 प्रदशिणा एवं शालग्राम जी को आगे कर 3 प्रदशिणा करें। तथा विवाह विधि पूर्ण करें। एवं भगवान का तिलक कर सदक्षिणा भगवान् को तुलसी जी अर्पित करें। सब विधि पूर्ण करें। इस प्रकार शालग्राम जी के साथ तुलसी जी का विवाह करने वाला भगवान् के धाम में प्रभु का सान्निध्य प्राप्त कर आनन्द प्राप्त करता है।

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